रायपुर। किसानों की आय बढ़ाने और वैकल्पिक लाभकारी खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पॉम योजना अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए जिला मुंगेली को 50 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को ऑयल पॉम की व्यावसायिक खेती अपनाने के लिए आकर्षक अनुदान और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
यह योजना किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ अधिक लाभकारी और आधुनिक कृषि पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। उद्यानिकी विभाग की सहायक संचालक ने बताया कि ऑयल पॉम का रोपण त्रिकोणीय आधार पर 9×9 मीटर दूरी में किया जाता है, जिसमें प्रति हेक्टेयर 143 इम्पोर्टेड टेनेरा किस्म के पौधे लगाए जाते हैं।
यह फसल किसानों के लिए दीर्घकालीन आय का मजबूत स्रोत मानी जा रही है। केंद्र शासन द्वारा ऑयल पॉम पौध रोपण के लिए विभिन्न मदों में अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पौध रोपण के लिए प्रति हेक्टेयर 29 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। वहीं पौधों के रखरखाव, खाद, दवा, उर्वरक एवं सिंचाई कार्यों के लिए चार वर्षों तक प्रति हेक्टेयर 05 हजार 250 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा अंतरवर्तीय फसल लगाने हेतु भी चार वर्षों तक प्रति हेक्टेयर 5 हजार 250 रुपये का अनुदान मिलेगा। ड्रीप सिंचाई स्थापना के लिए प्रति हेक्टेयर 31 हजार 399 रुपये की इकाई लागत पर लघु एवं सीमांत कृषकों को 55 प्रतिशत तथा अन्य कृषकों को 45 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
योजना अंतर्गत 2 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में ऑयल पॉम लगाने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, लघु, सीमांत एवं महिला कृषकों को डीजल अथवा इलेक्ट्रिक पंप हेतु 10 हजार रुपये तथा अन्य कृषकों को 8 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी। वहीं सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर बोरवेल खनन एवं पंप स्थापना के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये अथवा 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान भी किया गया है।
ऑयल पॉम प्रक्षेत्र में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट निर्माण हेतु भी 15 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा रखरखाव, अंतरवर्तीय फसल, ड्रीप स्थापना और फेंसिंग के लिए अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। जिले के इच्छुक किसान योजना का लाभ लेने उद्यान अधीक्षक शासकीय उद्यान रोपणी बाघामुड़ा, सारधा एवं सेन्दरी में संपर्क कर आवेदन जमा कर सकते हैं।
