विधानसभाओं के नतीजों के निहितार्थ – हरीश लखेड़ा

0
66

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव नतीजों के शोरगुल में देश के 4 राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव परिणामों की सियासी हलचल दब गई। दो तटीय राज्यों आंध्र प्रदेश और ओडिशा तथा पूर्वोत्तर के दो सीमांत राज्यों सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की विधानसभाओं के चुनाव नतीजे भी बृहस्पतिवार को ही आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपानीत एनडीए की आशातीत विजय के साथ सत्ता में वापसी ऐतिहासिक घटना है, लेकिन इन 4 राज्यों के चुनाव नतीजे देश के सियासी घटनाचक्र में कम महत्वपूर्ण नहीं हैं।

ओडिशा में बीजू जनता दल के प्रमुख व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक लगातार 5वीं बार सरकार बनाने जा रहे हैं। इससे पहले वे 2000, 2004, 2009 और 2014 में मुख्यमंत्री बने थे। अब वे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले सिक्किम के पवन कुमार चामलिंग और पश्चिम बंगाल के ज्योति बसु के बाद तीसरे नेता होंगे। जिस तरह से इस बार के लोकसभा चुनाव में देशभर में मोदी का जादू चला, उसी तरह ओडिशा में नवीन पटनायक का करिश्मा बरकरार रहा। हालांकि उनकी सीटें कुछ कम हुई हैं जबकि भाजपा की सीटें बढ़ी हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत बीजू पटनायक के 73 वर्षीय पुत्र नवीन पटनायक की बीजेडी को 146 सीटों वाली विधानसभा में पूर्ण बहुमत मिल गया। भाजपा को इस बार भी दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा है। प्रदेश में मुख्य मुकाबला बीजेडी और भाजपा के बीच था, हालांकि कांग्रेस भी मैदान में थीं। जाहिर है कि इस सफलता से अब नवीन पटनायक के नाम लंबे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकार्ड तो बनेगा ही, साथ ही देश की राजनीति में भी उनका कद बढ़ जाएगा। केंद्र के साथ उन्होंने कभी भी टकराव की राजनीति नहीं की।

दूसरी ओर देशभर में विपक्ष को एकजुट करने में लगे तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख चंद्र बाबू नायडू को आंध्र प्रदेश की जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया है। अब आंध्र प्रदेश में 46 साल के जगनमोहन रेड्डी राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। कुल 175 सीटों वाली प्रदेश विधानसभा में जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिल चुका है। जगनमोहन के पिता व आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएसआर राजशेखर रेड्डी की 2 सितंबर 2009 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। तब जगनमोहन खुद को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी मांग नहीं मानी। इससे नाराज होकर जगनमोहन ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया। 12 मार्च 2011 को उन्होंने युवजन श्रमिक रिथु कांग्रेस पार्टी यानी वाईएसआर कांग्रेस का गठन किया। उनकी पार्टी को 2014 में विधानसभा में 67 सीटें ही मिल पाई थीं।

चुनाव में करारी हार का सामना कर रहे नायडू कभी एनडीए के संयोजक भी रह चुके हैं। वे 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के साथ खड़े थे, लेकिन 2018 आते-आते कांग्रेस के खेमे में जाकर राहुल गांधी के पक्ष में खड़े हो गए। वे मोदी को सत्ता से दूर रखने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने के सूत्रधार की भूमिका निभाने में जुट गए। नायडू मानकर चल रहे थे कि भाजपानीत एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। इसलिए वे नतीजे आने से पहले ही तीसरा मोर्चा की सरकार बनाने के लिए कोशिश में लग गए। चंद्रबाबू नायडू को एंटी इनकंबैंसी का भी सामना करना पड़ा। इससे विधानसभा के साथ ही लोकसभा में भी टीडीपी को भारी शिकस्त मिली।

चीन व भूटान की सीमा से जुड़े सीमांत राज्य सिक्किम में इस बार भारी उलटफेर हो गया है। प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से अजेय रहे मुख्यमंत्री पवन चामलिंग के सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को अब विपक्ष में बैठना पड़ेगा। चामलिंग 5 बार यहां के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और फिर से चुनाव मैदान में थे। लेकिन इस बार कांटे की टक्कर में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने मात्र दो सीटों के अंतर से सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट से सत्ता छीन ली। प्रदेश विधानसभा में 32 सीटें हैं और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा को 17 सीटें मिलीं।

पूर्वोत्तर के एक अन्य राज्य अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने सत्ता में वापसी की है। प्रदेश की कुल 60 सीटें हैं। मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में आई है। जनता दल (यू) ने भी अपनी बेहतर उपस्थिति दर्ज की है। कांग्रेस वहां तीसरे स्थान पर रही है। खास बात यह है कि देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने खांडू दलबदल के सहारे ही भाजपा के मुख्यमंत्री बने। 2014 में वे कांग्रेस में थे। पेमा खांडू प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत दोरजी खांडू के पुत्र हैं।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here