Chhattisgarh

1 लाख के इनामी सहित 13 नक्सलियों को किया गिरफ्तार, विस्फोटक सामग्री बरामद…

सुकमा। जिले में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत बीते 13 दिसंबर 2024 को थाना चिन्तलनार क्षेत्र से 223 वाहिनी सीआरपीएफ, 74 वाहिनी सीआरपीएफ और जिला बल की संयुक्त टीम ने एरिया डोमिनेशन के लिए अभियान शुरू किया। इस दौरान दो अलग-अलग जगहों से एक 1 लाख के इनामी नक्सली समेत 13 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। यह सभी नक्सली सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से आने-जाने वाले मार्गों पर आईईडी लगाने की फिराक में थे।जानकारी के मुताबिक, मुकरम नाला जंगल के पास कुछ संदिग्ध व्यक्ति एरिया डोमिनेशन के लिए निकली 223 वाहिनी सीआरपीएफ, 74 वाहिनी सीआरपीएफ और जिला बल की संयुक्त टीम को देखकर भागने लगे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने घेरकर पकड़ लिया। पकड़े गए संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई, जिसमें उनकी पहचान माड़वी भीमा (आरपीसी पंच कमेटी अध्यक्ष), मड़कम बाजीराव (जगरगुण्डा एरिया एलओएस सदस्य, इनामी 1 लाख), माड़वी हुंगा, सोड़ी लखमा, मड़कम लच्छु, और सोड़ी गंगा के रूप में हुई। इनके पास से विस्फोटक सामग्री जैसे जिलेटिन रॉड, डेटोनेटर, स्पाइक होल, टिफिन बम, सिरिंज, पेंसिल सेल और पाइप बम बरामद किए गए।सुरक्षा बलों की पूछताछ के दौरान यह सामने आई कि इनका इरादा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से उनके आने-जाने वाले मार्गों पर आईईडी लगाने का था। इन सभी संदिग्धों ने नक्सल संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य करने की बात भी कबूल की है, जिसके बाद इनके खिलाफ थाना चिन्तलनार में अपराध क्रमांक 22/2024 के तहत विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।इसी तरह थाना चिन्तलनार क्षेत्र के पुलनपाड़ से तिम्मापुरम की ओर एक और अभियान चलाया गया, जहां कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को देखा गया। इन्हें भी सुरक्षा बलों ने घेरकर पकड़ा। पकड़े गए व्यक्तियों में सोड़ी देवा, सोड़ी मनीष, मड़कम सोनू, सोड़ी भीमा, हेमला जोगा, मड़कम नंगा और सोड़ी भीमा शामिल थे। इन सभी के खिलाफ विभिन्न अपराधों के तहत पहले से मामले दर्ज थे। पूछताछ में इन लोगों ने भी घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की। पूर्व में पकड़े गए नक्सलियों के अलावा इन्हें भी गिरफ्तार कर 14 दिसंबर को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। इस ऑपरेशन में जिला बल, 74, और 223 वाहिनी सीआरपीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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