लेख

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गवाह हाजिर हो…!

01 अक्टूबर 2015

प्रदेश के एक प्रमुख अखबार में यह खबर प्रमुखता से छपी है ‘पंकज संचोरा हाजिर हो….’ यह आवाज मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर की किसी न किसी कोर्ट में अक्सर सुनने को मिल जाती है. वजह है पंकज का शहर के पांच थानों के करीब 300 केसों में गवाह होना.

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जिन पत्तों पे तकिया था

01 अक्टूबर 2015

छत्तीसगढ़ में कोरबा लोकसभा के कांग्रेसी उम्मीदवार तथा केन्द्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत ने बहुत संजीदगी से कहा है कि मौजूदा चुनाव उनके जीवन का सबसे कठिन चुनाव रहा है. उन्हें अपने ही लोगों ने ज़्यादा धोखा दिया है. महंत पहले कई चुनाव जीत चुके हैं. तब उन्होंने ऐसा दुःख व्यक्त नहीं किया था. राजनीति में अपनों के द्वारा धोखा दिया जाना कोई नई फितरत नहीं है. उम्मीदवार को यह पूर्वानुमान बल्कि जानकारी होनी ही चाहिए कि आस्तीन में कितने सांप पल गए हैं. कुछ फुफकारते हैं. कुछ डस भी लेते हैं. उनसे निपटे बिना चुनाव लड़ना संभव नहीं है.

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यह उम्मीद अभी बाकि है

01 अक्टूबर 2015

बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा अपने निवास पर अपनी एक तस्वीर टांग रखी थी जिस पर लिखा था ‘युद्ध अभी खत्म हुआ नहीं, जग अभी जीता नहीं और मैं अभी हारा नहीं.’ वे कहते थे- योद्धा कभी नहीं मरते. बस यह याद रखने की बात है. आज से ठीक एक बरस पहले बस्तर के सपूत कर्म योद्धा महेंद्र कर्मा माओवादियों के हमले का शिकार हो गए.


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