छत्तीसगढ़

राधा के गाँव बरसाने की तरह जाँजगीर चाम्पा ज़िले में खेली जाती है लट्ठमार होली

जांजगीर-चांपा 2017-03-17 03:03 pm.
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मोरखबर जांजगीर ब्यूरो

राधा के गांव बरसाने की तरह ‘लट्ठमार होली’
- पंतोरा गांव में 3 सौ साल से चली आ रही परंपरा
- गांव की कुंवारी कन्याएं बरसाती हैं बांस की छड़ी
- भवानी मंदिर के देवी-देवताओं पर भी बरसती है छड़ी
- स्थानीय स्तर पर ‘डंगाही होली’ के नाम से चर्चित
- लोगों में विशेष मान्यता, लोग खुद पहुंचते हैं छड़ी खाने
- बीमारी से बचाव होने की है लोगों में अपार आस्था
- मड़वारानी के जंगल से लाई जाती है बांस की छड़ी
- गांव में लोगों के साथ घूमती हैं कुंवारी कन्याओं की टोली
- ड्यूटी में तैनात पुलिस भी छड़ी खाने पीछे नहीं रहते
- बलौदा के पंतोरा में धूल पंचमी पर मनती है लट्ठमार होली

जांजगीर-चांपा जिले का पंतोरा गांव, इस मायने में खास है कि राधा के गांव ‘बारसाने’ की तरह, रंग पंचमी के दिन पंतोरा में भी ‘लट्ठमार होली’ की परंपरा है। कोई पांच-दस साल से नहीं, बल्कि 3 सौ से अधिक सालों से पंतोरा में ‘लट्ठमार होली’ की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय स्तर पर इसे ग्रामीण ‘डंगाही होली’ भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन कुंवारी कन्याएं बांस की छड़ी बरसाती है और लोग भी बांस की छड़ी खाने लालायित नजर आते हैं। लोगों में आस्था है कि ऐसा करने से बीमारी नहीं फैलती।
                               जिला मुख्यालय जांजगीर से 55 किमी दूर पंतोरा गांव है और जहां विराजित है, मां भवानी मंदिर। भवानी मंदिर परिसर में ही रंग पंचमी के दिन हर साल, पंतोरा के लोग जुटते हैं और मड़वारानी के जंगल से बांस की छड़ी मंगाई जाती है। पूजा-अर्चना के पश्चात मां भवानी को बांस की छड़ी समर्पित की जाती है और माता से लोग, आषीर्वाद लेते हैं कि उनके गांव  में कोई बीमारी ना फैले। भवानी मंदिर में माता की पूजा के बाद कुंवारी कन्याओं द्वारा माता को 5 बार बांस की छड़ी समर्पित की जाती है और फिर मंदिर परिसर के देवी-देवताओं पर भी कुंवारी कन्याएं बांस की छड़ी बरसाती हैं। इसके बाद गांव के लोग, बांस की छड़ी से मार खाने पहुंचते हैं। भवानी मंदिर परिसर में जो सिलसिला शुरू होता है, वह पंतोरा की सभी गलियों से होते हुए वापस मंदिर में आकर थमता है।  लोगों में यह भी मान्यता है कि ‘डंगाही होली’ के दिन, जो भी व्यक्ति कुंवारी कन्याओं के हाथों बांस की छड़ी से मार खा लेता है, उसे मां भवानी बीमारी से दूर रखती है। यही वजह है कि पंतोरा के अलावा दूसरी जगहों से भी लोग, लट्ठमार होली के दिन पंतोरा पहंचते हैं और इतना ही नहीं, ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मी भी कुंवारी कन्याओं से बांस की छड़ी खाने पीछे नहीं रहते।

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