छत्तीसगढ़

भारत देश  में दक्षिणमुखी माता की एक मात्र प्रतिमा अड़भार में, शिव और शक्ति का अद्भुत सामंजस्य

जांजगीर-चांपा 2017-03-14 01:03 pm.
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मोरखबर जांजगीर ब्यूरो 

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के  अड़भार में मौजूद प्रसिद्ध मां अष्टभुजी मंदिर अनोखा है इस मंदिर को लेकर लोगों की आस्था है कि यहां मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है. मंदिर को लेकर क्षेत्र में कई तरह की किवदंतियां हैं. जानकर इस मंदिर को वैद्यशाला बताते हैं. जानकारों का कहना है कि भारत में दक्षिणमुखी माता की प्रतिमा कही नहीं है. साथ ही इस मंदिर में शिव और शक्ति का सामंजस्य भी है.
विओ-जांजगीर-चांपा जिले का प्रसिद्द मां अष्टभुजी मंदिर, जिला मुख्यालय जांजगीर से 55 किलोमीटर दूर जांजगीर-रायगढ़ बाई पास मार्ग पर नगर पंचायत अड़भार में स्थित है. वैसे तो इस मंदिर में हमेशा ही भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र में माता के दर्शन करने जिले और छत्तीसगढ़ के अलावा भी दूसरे राज्यों के लोग आते हैं. लोगों का मानना है कि मां अष्टभुजी के दरबार से आज तक कोई खाली नहीं गया. मां अष्टभुजी की पूजा का जिम्मा वैष्णव परिवार पर है. वर्तमान पुजारी पंडित राम कृष्ण द्विवेदी तीसरी पीढ़ी के पुजारी हैं. पंडित राम कृष्ण के मुताबिक पहले न तो मंदिर में इतनी भीड़ होती थी और ना इतने ज्योति कलश जलते थे. बीस साल पहले गांव के जमींदार परिवार ने एक ज्योति कलश जला कर परंपरा की शुरुवात की थी. यह मंदिर कई साल पुराना है. इसी वजह से इसे पुरातत्व विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है. मंदिर प्रबंधन लाखों रुपए होने के बाद भी मंदिर के जर्णोद्धार के लिए एक ईट तक नहीं लगा पा रहा. मंदिर के ट्रस्टी विकास चौबे का कहना है कि दक्षिण मुख प्रतिमा वाली माता की बड़ी मूर्ति अकेले अड़भार में विराजमान है. अष्टभुजी की पूजा माता के नौ रूपों में की जाती है, लेकिन कुछ लोग माता को महिसासुर मर्दिनी के नाम से पुकारते है. स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार यहॉ आकर वही लोग निवास कर सकते हैं जिन्हे घर के नींव की खुदाई में कोई न कोई धातु या रत्न मिले वहीं मंदिर को लेकर तरह तरह की रोचक मान्यताएं और किवदंतियां भी हैं।

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