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नहीं थम रहा छत्तीसगढ़ में मजदूरों का पलायन, सर्वाधिक पलायन जांजगीर जिले से 

जांजगीर-चांपा 2017-03-14 01:03 pm.
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मोरखबर जांजगीर ब्यूरो 

जाँजगीर चाम्पा जिले के ईंट 42 मजदूरों को हरियाणा में बंधक बनाया गया है। ठेकेदार के चंगुल से भागकर आए मजदूरों ने जिला प्रशासन को इसकी जानकारी एक महिने पहले थी, बाद में मजदूरों को छुड़ाकर छत्तीसगढ़ लाया गया। जिले के कारीभँवर, रीवाडीह, दर्राभाँठा और बस्ती बाराद्वार के मजदूर हरियाणा के सोनीपथ में ईंट भट्ठे में मजदूरी करने गए हुए थे शुरू में तो हालत सामान्य रहे मगर कुछ दिनों में ठेकेदार ने मजदूरों पर ज्यादती शुरू कर दी उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा, उन्हें भर पेट खाना भी नही दिया जा रहा था।  और जबरिया काम लिया जा रहा था।  
बि​ते दिनों छत्तीसगढ़ विधानसभा में सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए आंकड़ों की मानें तो सूबे में बीते तीन वर्षो में 95 हजार 324 लोगों ने अधिक मजदूरी के लालच में या परंपरागत ढंग से पलायन किया है। सर्वाधिक 29 हजार 190 पलायन जांजगीर चाम्पा जिले से हुआ है। यह वही जगह है जहां बड़ी संख्या में उदयोगों की स्थापना हुई है। इस दौरान मजदूरों को बंधक बनाए जाने के 243 मामले सामने आए थे.इस तरह से  हर महीने छत्तीसगढ़ के मजदूरों को बंधक बनाए जाने के औसतन 9 मामले हैं. इससे यह भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है हर माह छत्तीसगढ़ के करीब 27 मजदूरों को दीगर प्रांतों के ठेकेदार बंदी बना लेते हैं. जबकि इस मसले पर श्रम मंत्री का तर्क चौंकाने वाला है, सूबे के श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े कहते हैं कि, मजदूरों को अधिक भुगतान​ और एडवांस मिलने की वजह से मजदूर पलायन कर रहे हैं। वहीं सरकार पूरा दोष एजेंटों पर मढ़ रही है।  जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि, प्रदेश में बीते 10 सालों में 12 लाख से अधिक खेतीहर किसान भूमिहिन होकर मजदूरी के काम में लग गए, इसी बीच जिन जिलों में ज्यादा औदयोगिकरण हुआ, उन्हीं जिलों में पलायन के आंकड़े भी तेजी के साथ बढ़े हैं, सरकार की कोई एजेंसी बंधुआ मजदूरी को लेकर चिंतित नहीं है। इसी का नतिजा है कि, प्रदेश में बंधुआ मजदूरी के आंकड़ो में ईजाफा हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक 10 हजार से अधिक मजदूर रोजगार धंधों की तालाश में छत्तीसगढ़ से निकलकर दूसरे राज्यों में मजदूरी की तालाश में बंधुआ हो चुके हैं। यहां बंधुआ से आशय बांधकर रखे जाने से कहीं अधिक बंधुआ मजदूरी एक्ट के नियमों के पालन के संबंध में है। प्रदेश में ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब​ बंधुआ मजदूरों का दूसरे प्रदेशों में दैहिक शोषण भी हुआ है। समय रहते इस दिशा में कारगर कदम नहीं उठाने पर स्थिति चिंताजनक हो सकती है। 

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