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केंद्रीय बजट फरवरी में पेश हो या मार्च में, क्या फर्क पड़ता है : सुप्रीम कोर्ट

2017-01-19 12:01 pm.
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पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्रीय बजट को टालने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से भारतीय संविधान या कानून का वह प्रावधान बताने के लिए कहा जिससे सरकार को बजट टालने का निर्देश दिया जा सकता है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बजट एक फरवरी को पेश हो या एक मार्च को, इससे क्या फर्क पड़ता है।

मालूम हो कि इस वर्ष केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश होना प्रस्तावित है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा से कहा कि हमें आपकी याचिका में दम नहीं नजर आ रहा है लेकिन हम फिर भी आपको समय देते हैं कि आप बताइए संविधान या कानून का ऐसा कौन सा प्रावधान है जिसकी अनदेखी की जा रही है। पीठ ने याचिकाकर्ता को एक हफ्ते का समय देते हुए याचिका के साथ पुख्ता तथ्य जुटाने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि अगर किसी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है तो हम सरकार से इसका जवाब मांगेंगे। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा यह महज बजट पेश करने का मसला है। सभी लोग जानना चाहते हैं अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की क्या योजना है। इसमें गलत क्या है पीठ ने याचिकाकर्ता को 20 जनवरी तक का वक्त देते हुए कहा कि आप यह बताइए कि संविधान या कानून के किस प्रावधान का उल्लंघन हो रहा है।

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