छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का मोगली जंगल सफारी के आंगन में

रायपुर 2016-10-26 07:10 pm.
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छत्तीसगढ़ के बस्तर के जंगलों में रहने वाले मोगली को नई पहचान मिलने जा रही है। रायपुर के जंगल सफारी में चेंदरू की मुर्ती लगाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी इसका अनावरण करने जा रहे हैं। चेंदरू ने 10 साल की उम्र में बाघों के साथ फिल्माए गए फिल्म एन द जंगल सागा में मुख्य किरदार थे, चेंदरू की 2013 में मौत हो गई थी। इस फिल्म को आस्कर अवार्ड विजेता आर्ने सक्सडॉर्फ की स्विडिश फिल्म ने बनाय था। जब फिल्म जगत में मोगली और टार्जन जैसे किरदार जब कल्पनाओं में थे। उस दौरान बस्तर का मोगली चेंदरू, बाघों के साथ अटखेलियां करता नजर आता था। स्वीडिश फिल्म में पहली बार कोई बालक बाघों से खेलते हुए नजर आया था। चेंदरू धनुष बांण से पानी के भीतर मछली पर वार करता था। चेंदरूी के भीतर ऐसी क्षमता थी कि वह बन्दरों और खुंखार जंगली जानवरों से दोस्ती कर लेता था। छत्तीसगढ़ का चेंदरू पहला शक्स था जिसने फिल्मों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। आर्ने सक्सडॉर्फ की स्वीडिश फिल्म ‘एन द जंगल सागा’ में लगभग 10 बाघ और आधा दर्जन तेंदुओं का उपयोग किया गया था. फ़िल्म में दिखाया गया था कि किस तरह चेंदरू का दोस्त गिंजो एक मानवभक्षी तेंदुए को मारते हुए ख़ुद मारा गया और उसके बाद चेंदरू की किस तरह बाघ और तेंदुओं से दोस्ती हो गई. जब फ़िल्म का प्रदर्शन हुआ तो चेंदरू को भी स्वीडन समेत दूसरे देशों में ले जाया गया. साल 1958 में कान फिल्मि फेस्टिवल में भी यह फ़िल्म दिखाई गई। गढ़बेंगाल गांव में रहने वाला चेंदरू इस फिल्म के प्रदर्शन के दौरान महिनों तक विदेश में रहा। लोग उसे देखकर हैरान हो जाते थे कि एक 10 साल का बच्चा बाघों से खेलता है उनके साथ खाता पीता है। आदमखोर बाघों के नाम पर जब लोग डर से सिहर उठते थे तब चेंदरू बाघ की पीठ पर बैठकर जंगल सैर करने की बात करता था। फिल्म के प्रर्दशन के बाद चेंदरू दुनिया भर में मशहुर हो गया। फिल्म मेकर आर्ने सक्सडॉर्फ उसे गोद लेना चाहते थे। इसके लिए उनकी पत्नी एस्ट्रीड सक्सडॉर्फ ने भी हामी भर दी थी। लेकिन दोनो के बीच तलाक होने के बाद कोई चेंदरू को देखने भी नहीं आया। 4 मई 2001 को आर्न सक्सडार्फ की मौत हो गई। जात से चेंदरू मुरिया आदिवासी था मिजाज खुशनुमा और चेहरे पर हमेशा तैरती हुई मुस्कान चेंदरू की पहचान थी। कभी शोहरत की दुनिया में शिर्ष पर रहा चेंदरू। सारी जिंदगी गढ़बेंगाल से बाहर नहीं निकला। चेंदरू के बारे में किस्से कहानियां समेत जो भी पत्रकार बस्तर गया उसने लिखा ही है।

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