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कर्जदारों के नाम सार्वजानिक करना जरुरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली 2016-12-20 05:12 pm.
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दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी बैंकों के बड़े कर्जदारों के नाम सार्वजनिक करने का आदेश देने से फिलहाल इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नाम सार्वजनिक करना जरुरी नहीं है। हमें इस समस्या की तह में जाना होगा। हांलाकि चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने संकेत दिए है कि वो बैंकों के 85 हजार करोड़ रुपए दबा कर बैठे लोगों को कोई रियायत नहीं मिलने वाली है। बेंच ने सरकार से कहा है कि वो कर्ज वसूली को लेकर उठाए जा रहे कदमों का ब्यौरा 3 हफ्ते में दे। सरकार को ये जानकारी सीलबंद लिफाफे में देनी है। बता दें कि पिछली सुनवाई में रिजर्व बैंक की तरफ से सौंपी रिपोर्ट से ये पता चला था कि 57 लोगों पर 85 हजार करोड़ का कर्ज बकाया है। कोर्ट ने आरबीआई से पूछा था कि इन लोगों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं कर दिए जाते? आरबीआई ने बकायदारों के नाम सार्वजनिक करने पर एतराज जताते हुए कहा था कि ये बैंकों की गोपनीय जानकारी है। इसे सार्वजनिक करना बैंकों के व्यापारिक हित के खिलाफ होगा। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि नामों को सार्वजनिक करना समस्या का हल नहीं है। कोर्ट ने बैंकिंग सुधार के लिए बनाई गई कमिटी की सिफारिशें 4 हफ्ते में जमा कराने को कहा. इस मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी।

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