देश

SC ने नोट बंदी के खिलाफ दायर याचिका पर की सुनवाई, नोट बंद करने से किया इंकार

दिल्ली 2016-12-22 02:12 pm.
No image

दिल्ली. नोट बंदी के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुनवाई करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 500 और 1000 नोट को बंद करने से इंकार कर दिया है. बता दें की शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि नोट बंदी को लेकर हो रही जनता को परेशानी को कम करने के उपायों की जानकारी दी जाये.

प्रधान न्यायधीश तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड की पीठ ने कहा की हम नोट बंदी पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाएंगे. जब कुछ वकीलों ने सरकार की अधिसूचना पर रोक लगने की मांग की तब पीठ ने यह टिप्पणी की.  

आप को बता दें की एक वकील द्वारा नोट बंदी पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका दायर करने वाले वकील ने सरकार पर आरोप लगाया था....

  • ये है पूरा मामला   

सुप्रीम कोर्ट 500 और एक 1000 रूपए के नोट बंदी के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुनवाई कर सकता है.

न्यूज़ चैनल के माध्यम से टीवी पर प्रसारित देश के नाम संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और एक 1000 रूपए के नोट को बंद करने का ऐलान किया था.  

इस ऐलान के बाद सरकार ने 500 और 2000 रूपए के नए नोट भी जारी किये हैं.

प्रधानमंत्री के इस फैसले का विरोध करते हुए एक वकील ने याचिका दायर कर ये मांग की है कि नोट बंदी पर रोक लगाई जाये.

यह याचिका जस्टिस एआर देव की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने सुनवाई के लिए पेश की गई थी. इस याचिका पर सुनवाई आज हो सकती है.

इस याचिका को मद्दे नज़र रखते हुए केंद्र सरकार ने कहा है कि नोट बंदी पर कोई भी आदेश जारी करने से पहले सुप्रीम कोर्ट सरकार का पक्ष भी सुनलें.

याचिका दायर करने वाले वकील ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि जनता को नोट बदलने के लिए ज़्यादा वक्त नहीं दिया गया है. इस तरह के फौसले से जनता हलाकान और परेशान होगी.

याचिका दायर करने वाले वकील ने इस फैसले को आर्थिक आतंवाद का नाम देते हुए कहा कि नोट बंदी से सवा सौ करोड़ देश वासियों के सामने बड़ा संकट आ धमका है.

इस घोषणा के बाद से ही करेंसी संकट देश में पैदा हो गया है. बैंक, एटीएम और डाकघरों के सामने नोट बदलवाने के लिए लम्बी-लम्बी कतारें लग रही हैं.

सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से लोगों को होने वाली परेशानी के लिए कई कदम उठाए गए हैं. हालाकि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस घोषणा की बड-चढ़ कर आलोचना की है.

आप को बता दें की सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले पर दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र आज रखा गया है. इस सत्र में सरकार के इस फैसले पर विचार विमर्श होगा.  

 

इन्हें भी देखे

Follow Us




Copyright © BlueBanyan