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नोटबंदी पर मोदी ने कहा 'मेरी सरकार में बेईमानों का हिसाब चुकता होकर रहेगा'

कोबे-जापान। 2016-11-15 12:11 pm.
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कोबे-जापान। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी पर लोगों को हो रही परेशानी और इसे धैर्यपूर्वक सहने के लिए आम जनता के प्रति आभार व्यक्त किया है। कालेधन वालों और बिना हिसाब का पैसा रखने वालों को चेताते हुए कहा है कि अगर बिना हिसाब का पैसा हाथ आया, तो मैं उसका देश की आज़ादी से लेकर अब तक का हिसाब चेक करने वाला हूं। इसके लिए जितने नए लोगों को लाना पड़ेगा, लाकर इस काम में लगाऊंगा. ईमानदारी का पैसा है, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।  लेकिन ईमानदारी का पैसा नहीं है, तो बच नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग मुझे जानते हैं, उनमें कुछ समझदार भी हैं. उन्हें लग रहा है कि बैंक के बजाय गंगाजी में पैसा डालना ज़्यादा सही है।  पैसे मिले ना मिले, पुण्य तो मिल जाएगा। मेरी सरकार  में बेइमानों का हिसाब चुकता होकर रहेगा। उक्त बातें प्रधानमंत्री ने कोबे-जापान में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कही।  

उन्होंने कहा कि ये ठीक है कि पाप करने वालों की संख्या ज़्यादा नहीं है। लाख दो लाख, पांच लाख होगी। लेकिन मुसीबत करोड़ों देशवासियों को हो रही है।  इसके बावजूद वो झेलने को तैयार हैं। मेरे  हाल के अनुभव ने यह साबित किया। आपको भी पता है। मैं इसके लिए सवा सौ करोड़ देशवासियों को नमन् करता हूं। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों की प्रतिबद्धता को याद करते हुए कहा कि पहले गंगाजी में कोई चवन्नी नहीं डालता था, अब नोट बह रहे हैं। लेकिन आप मुझे बताइए कि चोरी का पैसा बाहर निकालना चाहिए या नहीं। अगर सामान्य आदमी को भी ज़िम्मेदारी उठाने की बात आती है तो वो पीछे नहीं हटता। प्रधानमंत्री ने कहा कि घर में शादी हैं, पैसा नहीं है, मां बीमार हैं, 1000 के नोट हैं, मुश्किल है. तकलीफ़ है।  लोग मुंह में उंगली डाल-डालकर कोशिश कर रहे हैं कि मोदी के ख़िलाफ़ कुछ बोलो. लेकिन मैं सलाम करता हूं जनता को। कोई चार घंटे लाइन में खड़ा रहा, कोई छह घंटे। लेकिन इस फ़ैसले को स्वीकार किया। ये अपने आप में देश के उज्ज्वल भविष्य की निशानी है। श्री मोदी ने कहा कि हमने कह दिया कि अगर कोई गृहिणी ढाई लाख रुपया बैंक में जमा कर देगी तो सरकार उससे नहीं पूछेगी कि ये कहां से आए थे। इस फ़ैसले का परिणाम क्या हुआ, जानते हैं? जो बेटे और कुछ बहुएं भी, जो वृद्धाश्रम में मां को रखकर आए थे, उन्होंने मां के खाते में ढाई-ढाई लाख रुपया जमा करा दिया। वो मां मुझे आशीर्वाद देगी कि नहीं देगी। ऐसा आशीर्वाद मिले, तो फिर योजना के कामयाब होने में कोई आशंका बचती है क्या। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये स्वच्छता का बहुत बड़ा अभियान है।  ये किसी को परेशान करने के लिए नहीं है. तकलीफ़ हुई है और मुझे इस बात का अंदाज़ा भी था। जब ये ऐलान किया था, उस दिन भी कहा था। इतना बड़ा देश है। 50 दिन दिए हैं। जल्दबाज़ी करने की कोई ज़रूरत नहीं है। अपनी ईमानदारी के पैसे जाकर जमा कराएं. ख़ाते में पैसे आ जाएंगे। 

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