शिक्षा परिषद की मानकों पर खरा नहीं उतरे देश के 57 मदरसे, मान्यता होगी निरस्त

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योगी आदित्यनाथ सरकार ने शुरुआत से ही मदरसों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। यही वजह है कि ठाकुर द्वारा तहसील के 57 मदरसों की मान्यता निरस्त करने की संस्तुति की गई है। दरअसल, 57 मदरसों के पास सिर्फ मान्यता थी, लेकिन मदरसा शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार रिकार्ड नहीं मिले। प्रदेश सरकार के आदेश पर बनी जांच समिति ने इसकी पुष्टि अपनी रिपोर्ट में की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मदरसा बोर्ड के मानकों पर 57 मदरसे खरे नहीं उतर पाए हैं। वहीं ये मदरसा संचालक कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर पाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के आदेश पर जिलाधिकारी ने एसडीएम, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी की समिति बनाकर जांच के लिए कहा था। 

पजिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि इसके बाद 69 मदरसों की जांच की गई, जिसमें सिर्फ 12 मदरसे ही मानकों पर खरे उतर सके। वहीं 57 मदरसों के पास मान्यता तो थी, लेकिन मदरसा शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार रिकार्ड नहीं दिखा सके। इन 57 मदरसों की मान्यता निरस्त करने की संस्तुति कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। उन्होंने बताया कि तीन सदस्यीय कमेटी ने मदरसों का स्थलीय निरीक्षण करने के साथ ही रजिस्टर्ड सोसाइटी और भूमि संबंधी प्रपत्रों की जांच की है, लेकिन ज्यादातर मदरसा संचालक रिकार्ड नहीं पेश कर सके। इतना ही नहीं कई मदरसे तो सिर्फ कागजों पर ही चल रहे थे। यहां न तो बच्चे मिले और न ही अध्यापक।

जानकारी के मुताबिक जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त 69 मदरसों की सूची जांच समिति को सौंपी गई थी। समिति ने करीब छह माह तक मदरसों की जांच की। इस जांच में कई मदरसे मौके पर नहीं मिले। मदरसा संचालकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग से जांच कराई तो वे सिर्फ कागजों पर चलते मिले।

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